लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को हल्की कमजोरी के साथ शुरुआत की। एशियाई बाजारों में आईटी शेयरों पर दबाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंताओं के बीच वैश्विक संकेत मिश्रित रहे, जिसका असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिला।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 64.74 अंक या 0.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,853.11 पर खुला। वहीं निफ्टी 68.60 अंक या 0.29 प्रतिशत फिसलकर 23,742.25 पर कारोबार की शुरुआत की।
हालांकि बाद के कारोबार में दोनों बेंचमार्कों में और तेजी दर्ज की गई। दिन के कारोबार में एक समय सेंसेक्स 478.18 अंक या 0.62 प्रतिशत उछलकर 77,96.04 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 135.5 अंक या 0.56 प्रतिशत चढ़कर 23,46.35 के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
सेक्टोरल आधार पर बाजार का रुख मिला-जुला रहा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी सूचकांक में 0.79 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा मेटल, ऊर्जा, प्राइवेट बैंक और पीएसयू बैंक शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
हालांकि हेल्थकेयर और फार्मा शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी 500 हेल्थकेयर, निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स और निफ्टी फार्मा सूचकांक में 0.23 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जिससे इस क्षेत्र में निवेशकों की रुचि बनी रही।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के रुख में बदलाव ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाया है। पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच में एफआईआई खरीदार रहे हैं और उन्होंने कुल 18,661 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे हैं।
पिछले दो वर्षों से एफआईआई की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही थी, लेकिन अब स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। मजबूत कॉर्पोरेट नतीजे और लार्जकैप शेयरों का आकर्षक मूल्यांकन बाजार को बुनियादी समर्थन प्रदान कर रहा है। वहीं एआई थीम-आधारित वैश्विक निवेशों में नरमी ने भी विदेशी निवेशकों की वापसी में मदद की है।
मंगलवार को एफआईआई ने लगातार तीसरे सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए 6,836 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीद दर्ज की थी। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार तीसरे दिन बिकवाली जारी रखी और 3,678 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में मजबूती देखने को मिली क्योंकि एआई क्षेत्र की बड़ी कंपनियों में खरीदारी लौटी। हालांकि कमजोर तिमाही नतीजों के बाद एप्पल के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।







