पाकिस्तान में हिंदू और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति का मुद्दा एक बार फिर ब्रिटिश संसद में उठाया गया है। पाकिस्तान में हिंदुओं के साथ कथित भेदभाव, जबरन धर्मांतरण, अपहरण, महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा तथा धार्मिक स्थलों पर हमलों को लेकर ब्रिटिश सांसदों ने चिंता जताई है। ब्रिटिश संसद में ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप फॉर ब्रिटिश हिंदूज से जुड़े सांसदों ने इस विषय पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने मांग की कि ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय का कोई वरिष्ठ मंत्री संसद में आकर बताए कि पाकिस्तान में हिंदू और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सरकार क्या कदम उठा रही है। इस मुद्दे ने ब्रिटेन की विदेश नीति और पाकिस्तान के साथ उसके राजनयिक संबंधों में मानवाधिकारों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
यह मामला 29 अक्टूबर 2026 को ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में उठा। सांसद बॉब ब्लैकमैन ने पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि ब्रिटिश हिंदुओं के लिए बने सर्वदलीय संसदीय समूह को हाल ही में इन समुदायों की स्थिति पर Insight UK की एक रिपोर्ट मिली है। उन्होंने रिपोर्ट की विषयवस्तु को गंभीर बताते हुए विदेश सचिव या विदेश मंत्रालय के किसी मंत्री को संसद में बुलाकर इस पर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि ब्रिटिश सरकार को केवल ब्रिटेन में रहने वाले धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि उन देशों में भी अल्पसंख्यकों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए, जहां उनके अधिकारों और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं
सांसद की इस मांग पर हाउस ऑफ कॉमन्स के नेता सर एलन कैंपबेल ने जवाब देते हुए कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ होने वाला व्यवहार सरकार के लिए महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने विशेष रूप से धार्मिक समुदायों की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव से जुड़े मुद्दों को गंभीर बताया। कैंपबेल ने आश्वासन दिया कि वह इस मामले को विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) के सहयोगियों के सामने उठाएंगे और संबंधित मंत्री से संसद में बयान देने की संभावना पर चर्चा करेंगे। उन्होंने ब्रिटेन के हिंदू समुदाय के योगदान की भी सराहना की। इस जवाब के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर ब्रिटिश सरकार की भूमिका पर निगाहें टिक गई हैं







