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सर्दी खांसी से छुटकारा दिलाने में कितनी असरदार मानी जाती है अदरक-तुलसी की चाय?

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सर्दी खांसी से छुटकारा दिलाने में कितनी असरदार मानी जाती है अदरक-तुलसी की चाय?

बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और गले में खराश की समस्या आम है। इससे बचने के लिए लोग दवाओं का सेवन करते हैं। वहीं कुछ लोग देसी घरेलू नुस्खे भी अपनाते हैं।

इन्हीं नुस्खों में से एक है अदरक और तुलसी की चाय। सर्दी खांसी होने पर अदरक-तुलसी की चाय लोग खूब पीते हैं। इसका इस्तेमाल घरेलू उपाय के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है।

गर्म चाय पीने से गले को आराम मिल सकता है और खांसी के कारण होने वाली असहजता कुछ समय के लिए कम हो सकती है। हालांकि सवाल ये है

कि क्या सच में अदरक-तुलसी की चाय सर्दी खांसी में कारगर मानी जाती है। डॉ. सतीश कौल, प्रिंसिपल डायरेक्टर और यूनिट हेड, इंटरनल मेडिसिन, FMRI गुड़गांव बता रहे हैं इसके पीछे की सच्चाई। 

क्या कहते हैं डॉक्टर

जिंजरोल्स जैसे सक्रिय तत्वों की उपस्थिति इस जड़ी बूटी को सूजन के खिलाफ एक प्राकृतिक उपचार के रूप में जोड़ी गई है। तुलसी में भी कई जैव सक्रिय तत्व हैं। लेकिन इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि इनमें से किसी भी जड़ी बूटी से बने चाय का सेवन आम सर्दी या खांसी का प्रभावी ढंग से इलाज कर सकता है। इसलिए हम कह सकते हैं कि इन उपचारों के लाभ सीमित हैं।

यह चाय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकती है। वहीं गर्म पेय गले में खराश और जलन को कम करने में मदद कर सकते हैं। चाय में शहद मिलाने से एक साल से ज्यादा उम्र के बच्चों और वयस्कों में खांसी कम हो सकती है। लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए।

लेकिन अदरक कुछ लोगों में अपच का कारण बन सकता है। सर्दी खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, खून वाली खांसी या लगातार तेज बुखार होने पर चिकित्सा जांच जरूरी है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अदरक तुलसी की चाय सामान्य सर्दी खांसी में आराम देने वाला घरेलूऑप्शन हो सकती है, लेकिन पर्याप्त आराम, तरल पदार्थों का सेवन और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सा ही बेहतर देखभाल का आधार हैं।

इसलिए अदरक तुलसी की चाय का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए और इसे दवाओं के विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए। सामान्य सर्दी खांसी अक्सर कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, लेकिन लक्षण लंबे समय तक बने रहने या बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।


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