बलरामपुर, 13 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में सात पहाड़ियों के बीच स्थित मालकेतु पर्वत की सबसे ऊंची चोटी पर पहाड़ी वाली माई का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।
शारदीय नवरात्र में यहां सुबह से शाम तक भक्तों का आना-जाना लगा हुआ है। छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद माता रानी पूरी करती हैं।
11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू होने के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई है। कोई अपनी मनोकामना लेकर माता के दरबार में पहुंच रहा है, तो कोई मुराद पूरी होने पर पूजा-अर्चना करने आ रहा है। पहाड़ की ऊंची चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊंचाई पर बने मंदिर से जुड़ी आस्था और यहां का प्राकृतिक परिवेश भक्तों को आकर्षित करता है।
पेड़ के नीचे तस्वीर रखकर शुरू हुई पूजा
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहाड़ी वाली माई मंदिर की शुरुआत एक पेड़ के नीचे माता की तस्वीर स्थापित कर पूजा करने से हुई थी। रामानुजगंज निवासी अशोक गोड़ को माता के दर्शन होने की मान्यता के बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू की गई। शुरुआत में श्रद्धालु पेड़ के नीचे रखी तस्वीर की पूजा करते थे। धीरे-धीरे लोगों की आस्था बढ़ी और भक्तों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया गया।
स्थानीय श्रद्धालुओं के मुताबिक, वर्ष 2014 के आसपास यहां नियमित पूजा-अर्चना शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 2015 के करीब मंदिर के विकास के लिए प्रयास किए गए। समय के साथ इस स्थान की पहचान बढ़ती गई और अब यहां पड़ोसी राज्यों से भी लोग दर्शन करने पहुंचते हैं।
नवरात्र में भजन-कीर्तन और विशेष पूजा
रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 14 की निवासी शर्मीला कुशवाहा बताती हैं कि नवरात्र के नौ दिनों तक मंदिर में सुबह और शाम भजन-कीर्तन होता है। सामान्य दिनों में भी प्रत्येक मंगलवार को श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। मौसम कैसा भी हो, भक्तों का आना-जाना जारी रहता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।
मंदिर के पुजारी पवन पांडेय के अनुसार, नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अखंड दीप प्रज्वलित करते हैं और नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। अष्टमी को भंडारा आयोजित होगा, जबकि नवमी पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा। इन आयोजनों में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।
296 सीढ़ियां, कार से पहुंचने की भी सुविधा
मालकेतु पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए 296 सीढ़ियां बनाई गई हैं। पुजारी पवन पांडेय के मुताबिक, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए करीब आधा किलोमीटर लंबी सीसी सड़क भी तैयार की गई है। इसके जरिए कार से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इससे बुजुर्गों और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी महसूस करने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलती है।
कम समय में पहाड़ी वाली माई का मंदिर रामानुजगंज की धार्मिक पहचान के रूप में उभरा है। नवरात्र के दौरान यहां पहुंच रहे श्रद्धालु बताते हैं कि इस स्थान से लोगों की आस्था लगातार जुड़ रही है। सात पहाड़ियों के बीच ऊंची चोटी पर स्थित यह मंदिर स्थानीय लोगों के साथ दूसरे राज्यों से आने वाले भक्तों के लिए भी पूजा-अर्चना का महत्वपूर्ण स्थल बन गया है।







