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कोरिया : ’सेवा की कहानी’ : सावित्री राजवाड़े हुईं आत्मनिर्भर, आर्थिक स्वावलंबन का आत्मविश्वास झलक रहा


शहर 25 September 2026
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कोरिया : ’सेवा की कहानी’ : सावित्री राजवाड़े हुईं आत्मनिर्भर, आर्थिक स्वावलंबन का आत्मविश्वास झलक रहा

’कोरिया, 25 सितंबर 2026

’ कोरिया जिले के ग्राम कैलाशपुर में रहने वाली श्रीमती सावित्री राजवाड़े का एक घरेलू महिला और सामान्य श्रमिक से आरंभ हुआ जीवन अब उनके खुद के व्यवसायी होने तक जा पहुंचा है। पहले दूसरे के खेतों में परिश्रम से आजीविका चलाने वाली सावित्री अब अपने स्वरोजगार से आत्मनिर्भर हो गई हैं। इस आत्मनिर्भरता का विश्वास उनकी आंखों से झलकने लगा है। उनकी मेहनत और अपने पैरों पर खड़ा होने की हिम्मत को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिषन बिहान ने संबल देकर अब उन्हें सालाना दो लाख रूपए  अर्जित करने वाली सावित्री राजवाड़े बना दिया है। अपने दम पर कुछ करने का आत्मविश्वास उन्हे लखपति दीदी की श्रेणी मे ले आया है।

श्रमिक जीवन से आरंभ
विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कैलाशपुर में रहने वाले श्री राधेश्याम एक कृषक परिवार के मुखिया हैं। उनकी पत्नी श्रीमती सावित्री पहले केवल घरेलू कृषि कार्य और उसके बाद शासन की रोजगार मूलक योजनाओं से मिलने वाले रोजगार के अवसरों का मोहताज था। ऐसे में परिवार के आर्थिक सक्षम ना होने से यह परिवार हमेषा अपने आवश्यक कार्यों के लिए पैसंों का संकट झेलता था। सावित्री ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की सोच रखते हुये रौषनी महिला स्व- सहायता समूह से जुड़ने का फैसला किया।

बिहान से बदली परिस्थितियां
बिहान से जुड़ने के बाद श्रीमती सावित्री के समूह को आरएफ और सीआईएफ की राषि मिली। इसके साथ इन्होने बैंक में लोन का आवेदन देकर स्वयंसिद्धा योजना के अंतर्गत कुल एक लाख रूपए का ऋण प्राप्त किया। इस राषि से इन्होने अपने घर में पहले किराना जनरल स्टोर और स्थानीय तौर पर मुर्गे की दुकान आरंभ की। उनकी कड़ी मेहनत से दोनों व्यवसाय साथ चल पड़ा और अब वह पूरे परिवार के साथ अपने स्वावलंबन के कार्यों में व्यस्त हैं जिससे उन्हे अच्छी आय प्राप्त हो रही है।

आत्मनिर्भरता से बढ़ा आत्मविष्वास
बिहान की मदद से आर्थिक स्वावलंबन प्राप्त कर चुकी श्रीमती सावित्री राजवाड़े बतलाती हैं कि पहले वह केवल एक घरेलू महिला थीं, घरेलू जरूरतों के लिए श्रमिक का कार्य भी करना मजबूरी थी। ऐसे समय में बिहान से जुड़कर उनके अंदर परिवार के लिए नया कुछ करने और अपने लिए आर्थिक निष्चिंतता अर्जित करने का विचार किया। इसमें बिहान ने मदद की और अब उनके पास खुद की आय के साधन है। उन्होने बताया कि लखपति दीदी की श्रेणी में आकर उनका सामाजिक और पारिवारिक सम्मान भी बढ़ा है।

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