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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन योजना : विष्णु कुमार को मूंगफली की खेती से मिला 60 हजार रुपए का शुद्ध लाभ


छत्तीसगढ़ 19 September 2026
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राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन योजना : विष्णु कुमार को मूंगफली की खेती से मिला 60 हजार रुपए का शुद्ध लाभ

महासमुंद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा में किसानों को सशक्त, आत्मनिर्भर और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने पर विशेष जोर रहा है। कृषि क्षेत्र में नवाचार, फसल विविधीकरण और शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब गांवों में दिखाई दे रहा है। महासमुंद जिले के विकासखंड सरायपाली के ग्राम जंगलबेड़ा के प्रगतिशील किसान विष्णुकुमार ओगरे ने वैज्ञानिक खेती और शासकीय योजना का लाभ उठाकर आर्थिक स्थिति में बदलाव लाया है।

कृषक विष्णु कुमार ओगरे ने भारत सरकार की राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन योजना के अंतर्गत खरीफ वर्ष 2025 में आयोजित मूंगफली प्रदर्शन कार्यक्रम में सहभागिता की। योजना के तहत उन्होंने 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की उन्नत किस्म कादरी लिपाक्षी (के-1812) का प्रदर्शन किया। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में उन्होंने समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, उचित सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण तथा फसल की नियमित निगरानी जैसी उन्नत कृषि तकनीकों को अपनाया।

प्रदर्शन क्षेत्र में 0.40 हेक्टेयर के लिए 40 किलोग्राम बीज की निर्धारित दर से बुवाई की गई। उन्नत बीज के उपयोग और वैज्ञानिक प्रबंधन से पौधों की अच्छी वृद्धि हुई तथा फसल स्वस्थ रही। फसल अवधि के दौरान कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी कर आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाए गए। इसके परिणामस्वरूप विष्णु कुमार ओगरे को कुल 10 क्विंटल मूंगफली का उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पादित मूंगफली को बाजार में 80 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेचने पर उन्हें 80,000 की सकल आय प्राप्त हुई। खेती में खाद, मजदूरी सहित अन्य लागत को काटने के बाद 60,000 का शुद्ध लाभ अर्जित किया।

विष्णु कुमार बताते हैं कि कृषि विभाग सरायपाली द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत बीज और समय-समय पर दिए गए तकनीकी मार्गदर्शन से उन्हें मूंगफली की खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायता मिली। उनका कहना है कि परंपरागत खेती के साथ किसानों को बाजार की मांग, मिट्टी एवं जलवायु की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक फसलों को भी अपनाना चाहिए।

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