प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के फिनटेक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की है। उन्होंने कहा है कि फिनटेक की सफलता की कहानी में एकीकृत भुगतान इंटरफेस -यूपीआई का निर्विवाद रूप से महत्वपूर्ण योगदान है। श्री मोदी ने मुंबई में ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि यह इतना बड़ा परिवर्तन है कि फिनटेक की चर्चा यूपीआई के बिना अधूरी रहेगी।
प्रधानमंत्री ने तकनीकी सशक्तिकरण के अपने मूल सिद्धांत को दोहराते हुए यूपीआई को वित्तीय समावेशन का सबसे अच्छा साधन बताया जिसने पारंपरिक बैंकिंग मॉडलों की ओर से उपेक्षित क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक पैठ बनाई है। प्रधानमंत्री ने बताया कि केवल अगस्त महीने में यूपीआई के माध्यम से 24 अरब से अधिक लेनदेन हुए। श्री मोदी ने कहा कि इसी प्रभाव के कारण फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि यूपीआई केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सभ्यतागत कहानी है। प्रधानमंत्री ने भारत की प्रमुख डिजिटल भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार का जिक्र करते हुए बताया कि यूपीआई अब 11 देशों में उपलब्ध है। इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय भुगतान के क्षेत्र में जिस गतिविधि की कभी कल्पना नहीं की जा सकती थी, वह अब रोजमर्रा की वास्तविकता बन गई है।
श्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतान के लिए अगले रणनीतिक चरण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए यूपीआई को साझेदार देशों की घरेलू भुगतान प्रणालियों के साथ तत्काल एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो सिंगापुर के साथ पहले से स्थापित निर्बाध सीमा पार सम्पर्क के समान हो। उन्होंने हितधारकों से उन सभी क्षेत्रों में वित्तीय नेटवर्क को सक्रिय रूप से जोड़ने का आग्रह किया जहां बड़ी संख्या में भारतीय आबादी रहती है या बडे पैमाने पर व्यापार होता है। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों के लिए आर्थिक लाभों पर बल देते हुए बताया कि धन भेजने वाली दुनिया की सबसे बड़ी आबादी के लिए लेनदेन की लागत को कम करना महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल भुगतान प्रणालियों को एकीकृत करने से लोगों को स्वदेश में अपने परिवारों को धन भेजने में काफी तेजी आएगी।







