Breaking News

कोर्ट ने कहा पूरा का पूरा 5.31 लाख वापस करो टैक्‍स बनता नहीं तो क्‍यों काटा TDS


व्यापार 25 August 2026
post

कोर्ट ने कहा पूरा का पूरा 5.31 लाख वापस करो टैक्‍स बनता नहीं तो क्‍यों काटा TDS

इनकम टैक्स से जुड़े मामलों में कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि व्यक्ति की वास्तविक टैक्स देनदारी नहीं बनती, फिर भी भुगतान के समय उसका टीडीएस (Tax Deducted at Source) काट लिया जाता है। ऐसे ही एक मामले में अदालत ने साफ कहा कि जब टैक्स liability ही नहीं बनती तो किसी व्यक्ति के पैसे को रोके रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने आदेश दिया कि काटी गई पूरी रकम वापस की जाए। इस मामले में करदाता से कुल 5.31 लाख रुपये का टीडीएस काट लिया गया था। हालांकि बाद में यह सामने आया कि उसकी आय पर इतना टैक्स बनता ही नहीं था। इसके बाद करदाता ने राहत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि अगर कानून के मुताबिक कोई टैक्स देय नहीं है तो सिर्फ टीडीएस कट जाने के आधार पर रकम सरकार के पास नहीं रखी जा सकती।

क्या होता है TDS?

टीडीएस यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें आय का भुगतान करने वाला व्यक्ति या संस्था भुगतान से पहले ही कुछ प्रतिशत टैक्स काट लेती है और उसे सरकार के खाते में जमा कर देती है। बाद में करदाता अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते समय इस राशि को एडजस्ट कर सकता है या अतिरिक्त कटौती होने पर रिफंड मांग सकता है।

कई बार सैलरी, ब्याज, ठेके की रकम या अन्य भुगतान पर नियमों के अनुसार टीडीएस काट लिया जाता है। लेकिन अगर पूरे साल की आय पर टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है तो काटी गई अतिरिक्त राशि वापस पाने का अधिकार करदाता के पास होता है।

टैक्स नहीं बनता तो पैसा रोकना गलत

अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि टैक्स वसूली का उद्देश्य सिर्फ नियमों के तहत सही राशि लेना है, न कि ऐसी रकम अपने पास रखना जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। अगर किसी व्यक्ति की आय पर टैक्स नहीं बनता और फिर भी टीडीएस कट गया है तो उसे वापस किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि करदाता से ली गई अतिरिक्त राशि को लंबे समय तक रोकना उचित नहीं है। टैक्स विभाग की जिम्मेदारी है कि वह कानून के अनुसार काम करे और योग्य व्यक्ति को उसका पैसा वापस मिले।

करदाताओं के लिए बड़ी राहत

इस फैसले को उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिनका टीडीएस तो कट जाता है, लेकिन उनकी अंतिम टैक्स देनदारी कम या शून्य होती है। खासकर नौकरीपेशा लोगों, वरिष्ठ नागरिकों और छोटे निवेशकों को कई बार ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। कई लोग जानकारी के अभाव में अपना टीडीएस रिफंड क्लेम नहीं कर पाते। ऐसे में जरूरी है कि समय पर इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल किया जाए और फॉर्म 26AS तथा AIS (Annual Information Statement) में दर्ज टीडीएस की जानकारी को जरूर जांचा जाए।

रिफंड के लिए क्या करना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति का टीडीएस कट गया है लेकिन उसकी वास्तविक टैक्स देनदारी नहीं बनती है तो उसे इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल कर रिफंड का दावा करना चाहिए। रिटर्न में सही आय, कटौती और टीडीएस की जानकारी देने के बाद विभाग द्वारा जांच की जाती है और पात्र होने पर रिफंड जारी किया जाता है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, टीडीएस कटना यह साबित नहीं करता कि उतना टैक्स देना ही पड़ेगा। यह केवल एडवांस में जमा की गई राशि होती है, जिसका अंतिम हिसाब इनकम टैक्स रिटर्न के दौरान होता है। लोगों को सतर्क रहने की जरूरत आज के समय में डिजिटल टैक्स सिस्टम के कारण करदाता अपने टैक्स रिकॉर्ड आसानी से देख सकते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति को अपनी आय और टैक्स से जुड़ी जानकारी पर नजर रखनी चाहिए। अगर कहीं अतिरिक्त टीडीएस कट गया है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस मामले में अदालत का फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि टैक्स व्यवस्था में करदाता के अधिकार भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितनी सरकार की राजस्व व्यवस्था। अगर किसी व्यक्ति से ऐसी राशि ली गई है जो कानून के अनुसार देय नहीं है, तो उसे वापस मिलना चाहिए। 5.31 लाख रुपये की वापसी का यह मामला उन सभी करदाताओं के लिए सीख है जो टीडीएस कटने के बाद बिना जांच किए चुप रह जाते हैं। सही जानकारी और समय पर कार्रवाई करके अपना पैसा वापस पाया जा सकता है।


You might also like!


RAIPUR WEATHER