भारत ने प्रस्तावित विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक पर अमेरिकी सांसद द्वारा उठाई गई आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा है कि विधायी मामले भारत के आंतरिक मामले हैं और इन पर निर्णय संसद द्वारा लिए जाते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान इस संबंध में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह बात कही। जायसवाल ने बताया कि अमेरिका सहित कई ऐसे देश हैं जो विदेशी निधियों के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।
भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के मुद्दे पर श्री जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली इस मुद्दे को उच्च प्राथमिकता देती है। उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास जहाजरानी मंत्रालय और उन देशों के समुद्री अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइनें भी चालू हैं ताकि सहायता की आवश्यकता होने पर कोई भी व्यक्ति उनसे संपर्क कर सके। उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध नौवहन और व्यापार के मुक्त प्रवाह का आह्वान करता रहता है। नई दिल्ली ने सभी पक्षों से नागरिक बुनियादी ढांचे और नागरिक जहाजों और नाविकों को निशाना बनाने से बचने का भी आह्वान किया है।
पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि इस घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। पाकिस्तान और सोमालिया के बीच हुए हालिया रक्षा समझौते पर श्री जायसवाल ने कहा कि भारत इन घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख रहा है।







