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ग्रामीण उद्यमिता को मिली नई उड़ान, स्टार्ट-अप विलेज प्रोग्राम से लाखों लोगों को फायदा


व्यापार 25 July 2026
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ग्रामीण उद्यमिता को मिली नई उड़ान, स्टार्ट-अप विलेज प्रोग्राम से लाखों लोगों को फायदा

केंद्र सरकार ने शनिवार को बताया कि स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (एसवीईपी) के तहत जून 2026 के अंत तक 4.32 लाख ग्रामीण उद्यमों को सहायता प्रदान की गई है। सरकार के अनुसार, इस योजना से उद्यमियों की आय और मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही समाज के वंचित वर्गों को उद्यमिता से जोड़ने में भी इस कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

86% लाभार्थी वंचित वर्गों से

सरकार के मुताबिक, एसवीईपी के तहत लाभान्वित होने वाले करीब 86% उद्यमी अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक समुदायों से हैं। असम, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ऐसे राज्य हैं, जहां इस योजना के तहत सबसे अधिक ग्रामीण उद्यमों को सहायता मिली है।

प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और मेंटरिंग की सुविधा

यह कार्यक्रम स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (एसआरएलएम) के माध्यम से संचालित किया जाता है। इसके तहत गैर-कृषि आधारित ग्रामीण उद्यमों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, मेंटरिंग और समुदाय-आधारित संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाता है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके।

अन्य योजनाओं के साथ समन्वय से बढ़ा दायरा

सरकार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (सीआरपी-ईपी), बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी पहलों के साथ समन्वय के जरिए एसवीईपी का दायरा लगातार बढ़ाया गया है। यह योजना स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है।

योजना के विस्तार के लिए बढ़ा केंद्रीय निवेश

योजना के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने फरवरी 2026 तक कुल 942.09 करोड़ रुपए की केंद्रीय हिस्सेदारी जारी की है। यह राशि वर्ष 2016 में योजना की शुरुआत से जनवरी 2018 तक जारी किए गए 112.39 करोड़ रुपए की तुलना में लगभग 738% अधिक है।

प्रति ब्लॉक 6.50 करोड़ रुपए का प्रावधान

एसवीईपी को स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन के माध्यम से लागू किया जाता है। इसके तहत प्रत्येक ब्लॉक के लिए 6.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जबकि प्रति उद्यम औसत निवेश 27,083 रुपए निर्धारित है।

महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को प्राथमिकता

सरकार के अनुसार, योजना के तहत कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन-एंटरप्राइज प्रमोशन (सीआरपी-ईपी) का चयन एसआरएलएम और परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा परीक्षण, प्रशिक्षण और प्रमाणन के बाद किया जाता है। इसमें स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनके पास व्यवसाय और गणित का बुनियादी ज्ञान हो।

सरकार ने बताया कि कम से कम 90% सीआरपी-ईपी स्वयं सहायता समूहों से जुड़े परिवारों से चुने जाते हैं, जबकि इस कैडर में महिलाओं की न्यूनतम 60% भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक सीआरपी-ईपी लगभग 50 उद्यमों को मेंटरिंग, प्रशिक्षण और ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करता है।

समावेशी ग्रामीण विकास का प्रभावी मॉडल

सरकार का कहना है कि एसवीईपी ने यह साबित किया है कि मजबूत सामुदायिक संस्थाओं के सहयोग से ग्रामीण उद्यमिता समावेशी आर्थिक विकास का सशक्त माध्यम बन सकती है। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों को सशक्त बनाकर इस योजना ने स्थानीय आकांक्षाओं को टिकाऊ व्यवसायों में बदलने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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