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अब मिनटों में चार्ज होगी बैटरी! भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक

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अब मिनटों में चार्ज होगी बैटरी! भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक

भारत के वैज्ञानिकों ने अगली पीढ़ी की रिचार्जेबल बैटरियों के लिए एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे बैटरियां पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से चार्ज हो सकेंगी। वैज्ञानिकों ने एक नया छिद्रयुक्त (Porous) ऑर्गेनिक एनोड मटेरियल तैयार किया है, जिसकी मदद से लिथियम-आयन बैटरी सिर्फ एक मिनट से थोड़ा अधिक समय में 80% तक चार्ज हो सकती है। साथ ही, यह तकनीक लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने में भी सक्षम है।

यह शोध भारतीय विज्ञान संवर्धन संघ (Indian Association for the Cultivation of Science-IACS) और एस. एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र (S. N. Bose National Centre for Basic Sciences-SNBNCBS) के वैज्ञानिकों ने संयुक्त रूप से किया है। दोनों संस्थान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत आते हैं।

शोध का नेतृत्व डॉ. उर्मिमाला मैत्रा (IACS) और डॉ. प्रदीप पचफुले (SNBNCBS) ने किया। वैज्ञानिकों ने कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (Covalent Organic Framework-COF) नामक नया पदार्थ विकसित किया है, जो बैटरी के भीतर लिथियम आयनों की गति को तेज बनाता है। लिथियम आयन ही बैटरी में ऊर्जा संग्रहित और स्थानांतरित करने का काम करते हैं। आयनों की तेज आवाजाही से बैटरी कम समय में अधिक तेजी से चार्ज हो पाती है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, नए मटेरियल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि तेज चार्जिंग के बावजूद बैटरी की क्षमता और जीवनकाल पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। कई बार चार्ज और डिस्चार्ज करने के बाद भी बैटरी का प्रदर्शन बेहतर बना रहा। यह तकनीक इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), स्मार्टफोन, लैपटॉप और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है, जहां तेज चार्जिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि यह नया मटेरियल केवल लिथियम आयनों ही नहीं, बल्कि सोडियम आयनों को भी प्रभावी ढंग से संग्रहित कर सकता है। इससे भविष्य में कम लागत वाली सोडियम-आयन बैटरियों के विकास का रास्ता भी खुल सकता है। सोडियम, लिथियम की तुलना में अधिक उपलब्ध और सस्ता है, इसलिए यह ऊर्जा भंडारण को और किफायती बना सकता है।

वैज्ञानिकों ने इस मटेरियल का सफल परीक्षण एक व्यावहारिक बैटरी डिवाइस में भी किया, जिससे इसके वास्तविक उपयोग की संभावना और मजबूत हुई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह नई तकनीक सुरक्षित, तेज चार्ज होने वाली और लंबे समय तक चलने वाली बैटरियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यह शोध दिखाता है कि कोवेलेंट ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क (COF) की वैज्ञानिक डिजाइन के जरिए आयनों की आवाजाही, ऊर्जा भंडारण क्षमता और बैटरी की संरचनात्मक मजबूती को एक साथ बेहतर बनाया जा सकता है। इससे भविष्य में कम लागत वाली, टिकाऊ और अल्ट्राफास्ट चार्जिंग बैटरियों का विकास संभव होगा।

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