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एसएआई और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर ने खेल विज्ञान और एथलीट देखभाल को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया।


खेल 09 July 2026
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एसएआई और सफदरजंग स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर ने खेल विज्ञान और एथलीट देखभाल को बढ़ावा देने के लिए हाथ मिलाया।

भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) और सफदरजंग खेल चोट केंद्र (एसआईसी) ने बुधवार को खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा, एथलीट पुनर्वास, अनुसंधान, नवाचार, शिक्षा और क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भारत के उच्च प्रदर्शन वाले खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।

युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के अधीन एसएआई और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन एसआईसी द्वारा हस्ताक्षरित समझौते का उद्देश्य भारतीय एथलीटों और सहायक कर्मचारियों को व्यापक सहायता प्रदान करने के लिए दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक क्षमताओं को मिलाकर एक एकीकृत ढांचा तैयार करना है।

यह सहयोग साक्ष्य-आधारित खेल विज्ञान और चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने, बहुविषयक अनुसंधान को सुगम बनाने, चोट की रोकथाम और पुनर्वास को मजबूत करने और वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के माध्यम से एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार करने पर केंद्रित होगा।

यह समझौता ज्ञापन खेल सचिव हरि रंजन राव और स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया। एसएआई की ओर से खेल विज्ञान विभाग के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने हस्ताक्षर किए, जबकि एसआईसी की ओर से सफदरजंग खेल चोट केंद्र के निदेशक डॉ. दीपक जोशी ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर बोलते हुए राव ने कहा कि उच्च प्रदर्शन वाले खेलों का भविष्य खेल विज्ञान और खेल चिकित्सा के सहज समन्वय पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी सहयोगात्मक अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार, एथलीटों की निगरानी और पुनर्वास के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा स्थापित करती है, जिससे भारतीय एथलीटों के लिए विश्व स्तरीय सहायता प्रणाली बनाने में मदद मिलती है।

श्रीवास्तव ने कहा कि खेल चिकित्सा और खेल विज्ञान एथलीटों के स्वास्थ्य और प्रदर्शन के लिए अपरिहार्य हो गए हैं, और उन्होंने कहा कि यह साझेदारी चोट की रोकथाम, नैदानिक ​​देखभाल, पुनर्वास और वैज्ञानिक अनुसंधान को मजबूत करने के लिए दोनों मंत्रालयों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

ब्रिगेडियर नायक ने कहा कि यह सहयोग बहुविषयक अनुसंधान, मानकीकृत नैदानिक ​​और खेल विज्ञान प्रोटोकॉल, ज्ञान के आदान-प्रदान और उन्नत एथलीट सहायता सेवाओं को सुगम बनाएगा। उन्होंने आगे कहा कि दोनों संस्थानों की शक्तियों को मिलाकर एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार और दीर्घकालिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए स्थायी वैज्ञानिक समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी।

डॉ. जोशी ने कहा कि यह साझेदारी देश भर के एथलीटों के लाभ के लिए अनुसंधान, शिक्षा, पुनर्वास और साक्ष्य-आधारित खेल चिकित्सा को और मजबूत करेगी।

सरकार ने कहा कि यह सहयोग वैज्ञानिक रूप से सक्षम, एथलीट-केंद्रित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खेल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की उसकी परिकल्पना के अनुरूप है। यह खेलो इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टीओपीएस) जैसी प्रमुख पहलों का पूरक है, साथ ही भारत को एक अग्रणी खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के विकसित भारत@2047 के लक्ष्य का समर्थन करता है।

इस साझेदारी से भारत की उच्च प्रदर्शन वाली खेल प्रणाली को मजबूती मिलने और ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों सहित भविष्य के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के लिए देश की तैयारियों में सुधार होने की उम्मीद है।

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