नागपुर, 19 जून। रक्षा मंत्री राजनाथ ने कहा कि अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना भारत के रक्षा उत्पादन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यह परियोजना स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमताओं का नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा कि पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं।
राजनाथ सिंह शुक्रवार को नागपुर के अंबाझरी ऑर्डनेंस फैक्टरी परिसर में 10 हजार टन क्षमता वाली अत्याधुनिक एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना के आधारशिला रखने के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि यह परियोजना भारत की बदलती और आत्मविश्वास से भरपूर सोच का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जिन आवश्यकताओं के लिए पहले भारत को विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता था, आज उन्हें देश के उद्योग और नागरिक स्वयं पूरा करने में सक्षम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।
रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक संघर्षों और युद्धों के दौरान आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका रहती है। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आवश्यक उपकरणों और सामग्रियों का उत्पादन देश के भीतर ही होना अत्यंत आवश्यक है।प्रस्तावित एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्रेस परियोजना को रक्षा उत्पादन क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति माना जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से रक्षा, एयरोस्पेस और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक उच्च क्षमता और उच्च सटीकता वाले एल्युमिनियम मिश्रधातु उत्पादों का बड़े पैमाने पर देश में निर्माण किया जा सकेगा।
रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारत के रक्षा औद्योगिक बुनियादी ढांचे को और अधिक सशक्त बनाने के साथ-साथ तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।
अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना से महत्वपूर्ण एल्युमिनियम घटकों के आयात पर निर्भरता कम होगी और स्वदेशी उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिलेगी तथा रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक रणनीतिक सामग्रियों के घरेलू उत्पादन में वृद्धि होगी।
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पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी पहले थीं : राजनाथ सिंह







