08 जून। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को जन भागीदारी, नवाचार, उद्यमशीलता और सामूहिक संकल्प के जरिए ही हासिल किया जा सकता है। नई दिल्ली में आयोजित माहेश्वरी समाज के राष्ट्रीय सम्मेलन में “माहेश्वरी समाज और विकसित भारत 2047” विषय पर संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उद्यमशीलता और राष्ट्र निर्माण दोनों को साथ-साथ आगे बढ़ाना होगा, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में समावेशी विकास, सामाजिक जिम्मेदारी और सक्रिय जन भागीदारी महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्र निर्माण में माहेश्वरी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका
ओम बिरला ने माहेश्वरी समाज को देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की एक सशक्त शक्ति बताते हुए कहा कि इस समाज ने सेवाभाव, नैतिक व्यावसायिक मूल्यों, परोपकार और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि समाज ने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, जनसेवा और धर्मार्थ गतिविधियों के जरिए लगातार जनकल्याण का कार्य किया है। साथ ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी विभिन्न क्षेत्रों में जनहित के लिए समर्पित संस्थानों की स्थापना कर समाज को नई दिशा दी है।
उद्यमशीलता से रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि माहेश्वरी समाज ने समय और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालते हुए देश के विभिन्न हिस्सों में आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महानगरों से लेकर उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत तक समाज के लोगों ने अपनी उद्यमशीलता के बल पर नए अवसर पैदा किए, रोजगार सृजित किए और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, नैतिक आचरण और सामाजिक सद्भाव के प्रति समाज की प्रतिबद्धता ने व्यवसाय जगत में अनुकरणीय मानक स्थापित किए हैं।
धन सृजन नहीं, वैल्यू क्रिएशन होना चाहिए लक्ष्य
ओम बिरला ने कहा कि सफलता का वास्तविक पैमाना केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि वैल्यू क्रिएशन और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। उन्होंने उद्यमी आनंद राठी की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यात्रा युवा उद्यमियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी के योगदान की भी प्रशंसा की और कहा कि उनके प्रयासों ने न्यायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने तथा न्यायिक सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि ऐसी हस्तियां समाज की उत्कृष्टता, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा की परंपरा को दर्शाती हैं।
विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं युवा
भविष्य निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षित, कुशल और प्रौद्योगिकी से लैस युवा विकसित भारत 2047 की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से नवाचार, उद्यमिता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उभरती तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय ज्ञान, तकनीक और नवाचार से संचालित होगा, इसलिए युवाओं को नौकरी तलाशने वालों के बजाय रोजगार सृजित करने वालों की भूमिका निभानी चाहिए।
जिम्मेदार नागरिकता और संस्थाओं के सम्मान पर जोर
ओम बिरला ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की प्रगति ने देश की दृढ़ता, आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प को प्रदर्शित किया है। उन्होंने अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए जिम्मेदार नागरिक बनना, संस्थाओं का सम्मान करना, ईमानदारी बनाए रखना और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि संसद और लोकतांत्रिक संस्थाओं के माध्यम से किए गए सुधारों से पारदर्शिता बढ़ी है और देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूती मिली है।
राष्ट्र प्रथम की भावना से साकार होगा विकसित भारत का सपना
अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने विश्वास जताया कि एकता, सेवा, उद्यमिता और “राष्ट्र प्रथम” की भावना भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने माहेश्वरी समाज, विशेषकर युवाओं से नवाचार, नैतिक नेतृत्व और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से राष्ट्रीय विकास में योगदान जारी रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक देश की प्रगति का भागीदार बने और आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जिम्मेदारी तथा सबके कल्याण की भावना को भी समान महत्व दिया जाए।







