अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सांसदों को बताया कि अमेरिका
और भारत एक बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से बस कुछ ही सप्ताह
दूर हैं। कल रात सदन की विदेश मामलों की समिति की सुनवाई के दौरान भारत की अपनी
हालिया यात्रा से संबंधित सवालों का जवाब देते हुए रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन और
नई दिल्ली समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं। विदेश मंत्री रुबियो ने बार-बार
भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में
रेखांकित किया, जो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने
लोकतंत्रों के बीच आर्थिक संबंधों में बढ़ती गति का संकेत है।
उन्होंने
कहा कि भारत यात्रा के दौरान उन्होंने क्वाड के समकक्षों से भी बातचीत की। क्वाड
में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने संकेत दिया कि चारों देश
संवाद से आगे बढ़कर ठोस परियोजनाओं की ओर बढ़ रहे हैं, जिनमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में
समुद्री सहयोग को बढ़ाना शामिल है। उन्होंने पैक्स सिलिका नामक एक नई पहल पर भी
प्रकाश डाला, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी
आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के लिए 14 देश मिलकर काम कर रहे हैं। ये 14 देश कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य में इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण
आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुरक्षा हेतु एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं। रुबियो ने
यह भी स्वीकार किया कि यूक्रेन में युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता के प्रयास
ठप पड़े हैं, और कहा कि न तो रूस और न ही यूक्रेन
शांति समझौते तक पहुंचने के लिए आवश्यक रियायतें देने को तैयार दिख रहे हैं।







