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कोरिया का भूजल स्तर नापने के लिए 25 से आरंभ होगा प्री-मानसून सर्वे


शहर 23 May 2026
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कोरिया का भूजल स्तर नापने के लिए 25 से आरंभ होगा प्री-मानसून सर्वे

कोरिया। आगामी 25 मई से कोरिया जिले के प्रत्येक ग्राम का भूजल स्तर नापा जाएगा। जलदूत एप्प के माध्यम से इसका आनलाइन रिकार्ड दर्ज किया जाएगा। यह प्री मानसून सर्वे होगा जिससे गांवों में जमीन के नीचे स्थित जल की वास्तविक स्थिति का आंकलन हो सकेगा। पूरे कोरिया जिले में अब प्रत्येक गांव के कुओं और बोरवेल की जल स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे किया जाएगा। भीषण गर्मी के दौरान ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार जिले की सभी ग्राम पंचायतों में 25 मई से 15 जून तक जलदूत मोबाइल एप्प के माध्यम से विशेष प्री-मानसून भूजल सर्वे अभियान संचालित किया जाएगा।

’अभियान का उददेश्य’

जलदूत एप्प के माध्यम से पूरे जिले में भूजल स्तर का आनलाइन डाटा रिकार्ड किया जाएगा। इसके बाद जब वर्षा काल में कोरिया जिले के सभी जगहों का पुनः भूजल स्तर नापा जाएगा तो वास्तविक स्थिति का आंकलन हो सकेगा। इससे कोरिया जिले में चल रहे जल सरंक्षण कार्यों, खेती के लिए हो रहे भूमिगत जल दोहन तथा हर गांव में जलसंचय या भूजल स्तर में बदलाव को विधिवत दर्ज किया जा सकेगा। यह जलसंकट की स्थिति को जांचने और आगामी कारगर कदम लिए जाने के लिए उपयोगी होगा।

’कैसे होगा कार्य’

जलदूत एप्प से भूजल स्तर के नाप की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जिला पंचायत सीईओ डॉ आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि इस विशेष अभियान के तहत चयनित खुले कुओं बोरवेल में उपलब्ध पानी की वर्तमान में गहराई मापकर उसका डिजिटल डेटा आनलाइन एप्प में दर्ज किया जाएगा। यह प्री मानसून रिकार्ड होगा। इसके बाद जब वर्षाकाल समाप्त होगा तक फिर से एक बार सभी जगहों पर भूजल स्तर की माप की जाएगी। इससे स्पष्ट डेटा संग्रह हो सकेगा।

’तकनीकी सहायक करेंगे कार्य’

जिला पंचायत सीईओ डॉ आशुतोष ने बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा प्राप्त निर्देशानुसार सभी जगहों पर मनरेगा के तकनीकी सहायक इस कार्य को संपादित कराएंगे। इस अभियान मंे जल की उपलब्धता वाले कूपों के अलावा सूखे कुंओं को भी शामिल किया जाएगा। इससे भूजल संरचना, जल उपलब्धता तथा जलस्तर में होने वाले बदलावों का अधिक विस्तृत विश्लेषण किया जा सकेगा।  अभियान के तहत वर्ष में दो बार डेटा संग्रह किया जाएगा। इससे वर्षा के बाद भूजल स्तर में हुए सुधार का तुलनात्मक अध्ययन भी संभव हो सकेगा।

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