नई दिल्ली : देश में ऑटोमोबाइल सेक्टर ने अप्रैल महीने में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। इंडस्ट्री डेटा के अनुसार, रिटेल ऑटो बिक्री साल-दर-साल आधार पर 12.94% बढ़कर 26.11 लाख यूनिट तक पहुंच गई। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह ग्रामीण भारत में पैसेंजर वाहनों, टू-व्हीलर्स और ट्रैक्टरों की बढ़ती मांग को माना जा रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन्स (FADA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पैसेंजर वाहनों की रिटेल बिक्री अप्रैल में 12.21% की वृद्धि के साथ 4,07,355 यूनिट रही। यह अब तक के इतिहास में अप्रैल महीने की सबसे अधिक बिक्री है, जो बाजार की मजबूत मांग को दर्शाता है।
ग्रामीण भारत ने इस ग्रोथ में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिक्री 20.40% बढ़ी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह वृद्धि केवल 7.11% रही। यानी ग्रामीण बाजार की ग्रोथ शहरी क्षेत्रों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दर्ज की गई। FADA के वाइस प्रेसिडेंट साई गिरिधर ने इस प्रदर्शन को टियर-3 शहरों और ग्रामीण भारत में व्यक्तिगत परिवहन (पर्सनल मोबिलिटी) के विस्तार का संकेत बताया। उनके अनुसार, यह बदलाव देश के ऑटो सेक्टर में एक संरचनात्मक (structural) परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस वृद्धि को छोटी कारों की वापसी, SUV की लगातार मजबूत मांग और वैकल्पिक ईंधन वाहनों के बेहतर मिश्रण (product mix) से सपोर्ट मिला है।
खासकर CNG वाहनों की हिस्सेदारी बढ़कर 22.62% तक पहुंच गई है, जो इस सेगमेंट में मजबूत मांग को दर्शाता है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की हिस्सेदारी भी बढ़कर 5.77% हो गई है, जो देश में हरित और वैकल्पिक ऊर्जा वाहनों की ओर बढ़ते रुझान को दिखाती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ईंधन की कीमतों और पर्यावरण जागरूकता के चलते CNG और EV वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। ट्रैक्टर और टू-व्हीलर सेगमेंट में भी ग्रामीण मांग ने अहम भूमिका निभाई है, जिससे कुल ऑटो बिक्री को मजबूती मिली है। कृषि गतिविधियों और ग्रामीण आय में सुधार का सीधा असर ट्रैक्टर बिक्री पर देखने को मिला है।







