चेन्नई: भारत का सर्विस एक्सपोर्ट सेक्टर तेजी से बढ़ते हुए चालू वित्त वर्ष में 500 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार करने की ओर बढ़ रहा है। पिछले वित्त वर्ष FY26 में यह आंकड़ा लगभग 418 बिलियन डॉलर था, जो अब मजबूत वृद्धि के साथ आगे बढ़ता दिख रहा है। इस बढ़त के साथ सर्विस एक्सपोर्ट, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट से आगे निकलने की स्थिति में पहुंच रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, सर्विस सेक्टर की यह प्रगति भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। आईटी सेवाएं, बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट, फाइनेंशियल सेवाएं और कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में लगातार मांग बढ़ने से निर्यात में तेजी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही रफ्तार बनी रहती है, तो 2030 तक सर्विस एक्सपोर्ट 1 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। यह लक्ष्य भारत को वैश्विक सेवा बाजार में और मजबूत स्थिति दिला सकता है। सर्विस सेक्टर की एक बड़ी खासियत यह है कि यह अपने दम पर विकास कर रहा है और देश के कुल व्यापार संतुलन में सकारात्मक योगदान दे रहा है। खासकर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में होने वाले ट्रेड डेफिसिट को कम करने में यह क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
गुड्स एक्सपोर्ट के मुकाबले सर्विस एक्सपोर्ट में लागत अपेक्षाकृत कम होती है और इसमें वैल्यू एडिशन अधिक होता है, जिससे विदेशी मुद्रा अर्जन में भी बढ़ोतरी होती है। यही कारण है कि नीति निर्धारक इस क्षेत्र को और प्रोत्साहन देने पर जोर दे रहे हैं। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर सेवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में है। डिजिटल सेवाएं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रिमोट वर्क मॉडल जैसे नए क्षेत्रों ने इस सेक्टर को और मजबूती दी है।
हालांकि, उद्योग जगत का मानना है कि इस विकास को बनाए रखने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए सरकार से अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है। इसमें ड्यूटी और टैक्स में छूट से जुड़ी योजनाएं अहम मानी जा रही हैं। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सरकार निर्यातकों को कर राहत और अन्य प्रोत्साहन देती है, तो भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में और प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं। इससे देश की हिस्सेदारी ग्लोबल सर्विस मार्केट में और बढ़ेगी।
इसके अलावा, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना भी इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए जरूरी माना जा रहा है। कुशल मानव संसाधन और बेहतर तकनीकी सुविधाएं भारत को सेवा निर्यात में और आगे ले जा सकती हैं। सरकार पहले ही कई योजनाओं के जरिए निर्यात को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है, लेकिन उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले समय में और ठोस कदम उठाए जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्विस सेक्टर की यह तेजी भारत की अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने में मदद करेगी और विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूत बनाएगी। यह क्षेत्र रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। फिलहाल, सर्विस एक्सपोर्ट की यह बढ़त भारत के लिए एक सकारात्मक आर्थिक संकेत मानी जा रही है और आने वाले वर्षों में इसके और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।







