प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के क्रिटिकैलिटी हासिल करने पर देश के परमाणु वैज्ञानिकों की सराहना की, जिससे भारत का गौरव बढ़ा है। आकाशवाणी के अवसर पर अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में राष्ट्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि क्रिटिकैलिटी वह अवस्था है जब कोई रिएक्टर पहली बार सफलतापूर्वक स्व-संचालित परमाणु श्रृंखला अभिक्रिया को प्राप्त करता है। यह अवस्था रिएक्टर के परिचालन चरण में प्रवेश करने का संकेत देती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह परमाणु रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से निर्मित है। उन्होंने विस्तार से बताया कि ऊर्जा उत्पादन के अलावा, ब्रीडर रिएक्टर भविष्य के लिए नए ईंधन का भी उत्पादन करता है। उन्होंने मार्च 2024 में कल्पक्कम में रिएक्टर की कोर लोडिंग देखने का स्मरण किया। उन्होंने भारत के परमाणु कार्यक्रम में अमूल्य योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के वैज्ञानिक नागरिक परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक विकास, ऊर्जा क्षेत्र और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को लाभ हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम ने कृषि से लेकर आधुनिक नवप्रवर्तकों तक सभी की मदद की है।
प्रधानमंत्री मोदी ने पवन ऊर्जा की शक्ति के बारे में भी बात की और कहा कि यही शक्ति भारत को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि भारत ने हाल ही में पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो गई है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि अकेले पिछले वर्ष में ही लगभग 6 गीगावाट की नई क्षमता जोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है और पवन ऊर्जा क्षमता में विश्व में चौथे स्थान पर है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और राजस्थान सहित देश के कई राज्य इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। गुजरात के कच्छ, पाटन और बनासकांठा जैसे क्षेत्रों में बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि युवाओं को रोजगार के नए अवसर और रास्ते मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा भारत के विकास के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने बिजली संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने आगे कहा कि देश में हर स्तर पर ऐसे प्रयास आवश्यक हैं, क्योंकि यही वे प्रयास हैं जो व्यापक परिवर्तन लाते हैं।
आज के 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने चल रहे जनगणना अभियान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को जनगणना अभियान के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जो विश्व की सबसे बड़ी जनगणना है। श्री मोदी ने विस्तार से बताया कि जनगणना 2027 को डिजिटल कर दिया गया है और सभी जानकारी सीधे डिजिटल रूप में दर्ज की जा रही है। घर-घर जाकर जनगणना करने वाले कर्मचारियों के पास सभी जानकारी दर्ज करने के लिए एक मोबाइल ऐप है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार जनगणना को आसान बनाया गया है, जिसमें लोग अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा जनगणना करने वाले कर्मचारियों के आने से 15 दिन पहले उपलब्ध होगी। लोग अपनी सुविधानुसार जानकारी दर्ज कर सकते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उन्हें अपने मोबाइल या ईमेल पर एक विशेष आईडी प्राप्त होगी। बाद में, जब जनगणना करने वाले कर्मचारी उनके घर आएंगे, तो लोग इस आईडी को दिखाकर जानकारी सत्यापित कर सकते हैं। श्री मोदी ने कहा कि इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया सरल हो जाएगी। उन्होंने बताया कि जिन राज्यों में स्वयं जनगणना पूरी हो चुकी है, वहां जनगणना कर्मचारियों ने घरों की गणना भी शुरू कर दी है। अब तक लगभग एक करोड़ बीस लाख परिवारों की घर-घर सूची तैयार की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनगणना केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि यह हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोगों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है और उन्होंने आश्वासन दिया कि दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित, गोपनीय और डिजिटल सुरक्षा से संरक्षित है। उन्होंने सभी से इस प्रक्रिया में भाग लेने और जनगणना 2027 को सफल बनाने का आग्रह किया।
श्री मोदी ने कहा कि मई माह की शुरुआत पवित्रता के साथ हो रही है, क्योंकि 1 मई को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि विश्व में व्याप्त तनाव और संघर्षों के बीच बुद्ध की शिक्षाएं और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। प्रधानमंत्री ने दक्षिण अमेरिका के चिली में स्थित एक संगठन का जिक्र किया, जो भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का प्रचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास लद्दाख में जन्मे द्रुबपोन ओत्जर रिनपोचे के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह संगठन ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रहा है। श्री मोदी ने कहा कि कोचीगुआज घाटी का स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बौद्ध परंपरा सभी को प्रकृति से जुड़ना सिखाती है। प्रधानमंत्री ने कर्नाटक के कर्मा मठ का उदाहरण दिया, जो 100 एकड़ में फैला एक जीवंत वन क्षेत्र है। इस वन में 700 से अधिक देशी वृक्षों का संरक्षण किया गया है। श्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से प्रकृति संरक्षण की कई प्रेरणादायक कहानियां सामने आई हैं। उन्होंने आज 'मन की बात' के श्रोताओं के साथ कुछ उदाहरण साझा किए। उन्होंने कच्छ के रण का जिक्र किया, जहां मानसून खत्म होते ही हर साल लाखों राजहंस आते हैं। उन्होंने बताया कि पूरा इलाका गुलाबी हो जाता है, इसलिए इसे 'फ्लेमिंगो सिटी' नाम दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि कच्छ के लोग इन्हें 'लाखा जी की बाराती' कहते हैं। उन्होंने खुशी जताई कि अब लाखा जी की बाराती कच्छ में पर्यावरण संरक्षण का एक खूबसूरत प्रतीक बन गई हैं। श्री मोदी ने उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र का भी जिक्र किया, जहां फसल कटाई के मौसम में हाथियों के झुंड गांवों के पास आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे संघर्ष का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब 'गज मित्र' जैसे प्रयास शुरू हो गए हैं। ग्रामीण खुद हाथियों की निगरानी के लिए टीमें बनाते हैं और समय रहते लोगों को सतर्क करते हैं। इससे संघर्ष कम हो रहा है और जनता का विश्वास बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने मध्य भारत से एक अच्छी खबर साझा करते हुए छत्तीसगढ़ में काले हिरणों की वापसी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'इनकी संख्या काफी कम हो गई थी, लेकिन निरंतर प्रयासों से संरक्षण में वृद्धि हुई है।' आज वे एक बार फिर खुले मैदानों में विचरण करते नजर आ रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोदावन) के संरक्षण में भी ऐसी ही उम्मीद नजर आ रही है। यह पक्षी कभी देश के रेगिस्तानी इलाकों की पहचान हुआ करता था, लेकिन इसकी संख्या घट गई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पर था, लेकिन इसके संरक्षण के लिए एक बड़ा अभियान चल रहा है। वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया जा रहा है और प्रजनन केंद्र स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र की सफलता के बारे में भी बात की। उन्होंने विस्तार से बताया कि जिसे कभी बोझ समझा जाता था, वह अब रोजगार, व्यापार और नवाचार को नई गति प्रदान कर रहा है। ब्रिटिश कानून के अनुसार, बांस को एक वृक्ष माना जाता था और इससे जुड़े नियम बहुत सख्त थे। श्री मोदी ने कहा कि बांस का परिवहन बहुत कठिन था और परिणामस्वरूप लोग बांस से संबंधित व्यवसायों से दूर होने लगे थे। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने 2017 में कानून में बदलाव किया और बांस को वृक्षों की श्रेणी से हटा दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने संतोष व्यक्त किया कि आज पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र फल-फूल रहा है। श्री मोदी ने त्रिपुरा के गोमती जिले के बिजय सूत्रधार और दक्षिण त्रिपुरा के प्रदीप चक्रवर्ती का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'उन्होंने नए कानूनों को अपने लिए एक बड़ा अवसर समझा और अपने काम को प्रौद्योगिकी के साथ एकीकृत किया। आज वे पहले से कहीं बेहतर और अधिक बांस उत्पाद बना रहे हैं।' श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नागालैंड के दीमापुर और आसपास के क्षेत्रों में कई स्वयं सहायता समूह हैं जिन्होंने बांस आधारित खाद्य उत्पादों में मूल्यवर्धन किया है। उन्होंने कहा कि खोरोलो क्रिएटिव क्राफ्ट्स जैसी टीमें भी हैं जो बांस के फर्नीचर और हस्तशिल्प पर काम कर रही हैं। उन्होंने आगे बताया कि मिजोरम के मामित जिले में टीमें बांस की टिशू कल्चर और पॉलीहाउस प्रबंधन पर काम कर रही हैं। उन्होंने सिक्किम के गंगटोक के पास स्थित लगस्तल बांस एंटरप्राइज टीम के बारे में भी बताया, जो बांस से हस्तशिल्प, अगरबत्ती, फर्नीचर और इंटीरियर डेकोरेशन का सामान बनाती है। श्री मोदी ने लोगों से पूर्वोत्तर से एक बांस उत्पाद खरीदने का आग्रह किया और कहा कि उनके प्रयासों से बांस उत्पाद बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि बीटिंग रिट्रीट गणतंत्र दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह समारोह विभिन्न बैंडों की विविध संगीत परंपराओं को प्रदर्शित करता है। श्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय संगीत का समावेश बढ़ा है, जिसे देश भर के लोग पसंद कर रहे हैं। इस वर्ष का बीटिंग रिट्रीट समारोह भी यादगार रहा, जिसमें वायुसेना, सेना, नौसेना और सीएपीएफ बैंडों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि बीटिंग रिट्रीट की भव्य संरचनाएं सभी का ध्यान आकर्षित करती हैं। उन्होंने कहा कि वायुसेना बैंड ने सिंदूर फॉर्मेशन और नौसेना बैंड ने मत्स्य यंत्र फॉर्मेशन का प्रदर्शन किया। सेना बैंड के प्रदर्शन में वंदे मातरम के 150 वर्ष और क्रिकेट में भारत की सफलता को भी दर्शाया गया। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि एक अत्यंत सराहनीय पहल की गई है और बीटिंग रिट्रीट का संगीत वेव्स ओटीटी पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यह भविष्य में अन्य प्लेटफार्मों पर भी उपलब्ध होगा। उन्होंने लोगों से इस प्रदर्शन को सुनने और सशस्त्र बलों और उनकी परंपराओं पर गर्व करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार ने 20 करोड़ से अधिक अमूल्य दस्तावेजों को डिजिटाइज़ करके सार्वजनिक किया है। उन्होंने बताया कि इन दस्तावेजों में भोज पत्र पर लिखी सातवीं शताब्दी की गिलगित पांडुलिपियां और आठवीं शताब्दी का एक रोचक ग्रंथ, श्रीभूवालय शामिल हैं। इन दस्तावेजों में रानी लक्ष्मीबाई से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पत्र भी हैं, जिनसे उनके द्वारा 1857 में लिए गए कुछ निर्णयों का पता चलता है। नेताजी के जीवन, आज़ाद हिंद फौज और उनके भाषणों से संबंधित कई दस्तावेज भी हैं। पंडित मदन मोहन मालवीय से संबंधित भी कई दस्तावेज हैं, जिनमें बीएचयू की स्थापना और हिंदी साहित्य सम्मेलन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी शामिल है। संविधान सभा से संबंधित कई अनूठे दस्तावेज भी उपलब्ध हैं। श्री मोदी ने श्रोताओं से भारत के इतिहास के अद्भुत अनुभव के लिए www.abhilekh-patal.in पर जाने का आग्रह किया । प्रधानमंत्री ने इस महीने की शुरुआत में फ्रांस के बोर्डो में आयोजित यूरोपीय गर्ल्स मैथमेटिकल ओलंपियाड में भाग लेने वाली और छठा स्थान प्राप्त करने वाली टीम की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह विश्व की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में से एक है और देश की बेटियों ने इस ओलंपियाड में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। प्रतिभाशाली टीम में मुंबई की श्रेया मुंद्रा, तिरुवनंतपुरम की संजना चाको, चेन्नई की शिवानी भरत कुमार और कोलकाता की श्रीमोई बेरा शामिल थीं। श्रेया ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। संजना ने रजत पदक और शिवानी ने कांस्य पदक प्राप्त किया। प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि भारत में इस ओलंपियाड के लिए चयन प्रक्रिया अपने आप में बहुत कठिन है। यह एक बहु-स्तरीय चयन प्रक्रिया है, जिसमें क्षेत्रीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केंद्र में आयोजित एक महीने के गणित प्रशिक्षण शिविर में भाग लेते हैं। इस शिविर के अंत में, एक टीम चयन परीक्षा आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर भारतीय टीम का चयन किया जाता है। हर साल, देश भर से लगभग 6 लाख छात्र इस गणित ओलंपियाड कार्यक्रम में भाग लेते हैं। श्री मोदी ने इन प्रतिभाशाली लड़कियों को सहयोग देने के लिए अभिभावकों की भी सराहना की।
प्रधानमंत्री मोदी ने गर्व व्यक्त किया कि ब्राजील में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय पनीर प्रतियोगिता में दो भारतीय पनीर ब्रांडों को प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। उन्होंने कहा कि भारत के डेयरी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव हो रहा है और भारतीय पनीर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने जम्मू और कश्मीर के कलारी पनीर का उदाहरण दिया, जिसे "कश्मीर का मोज़ेरेला" कहा जाता है। गुर्जर-बकरवाल समुदाय पीढ़ियों से इसे बनाता और खाता आ रहा है। श्री मोदी ने सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में लोकप्रिय "छुरपी" का भी जिक्र किया। उन्होंने "टोपली नु पनीर" के बारे में भी बताया, जिसे महाराष्ट्र और गुजरात में "सुरती पनीर" के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक तकनीक विकसित हो रही है, पैकेजिंग में सुधार हो रहा है और भारतीय उत्पाद विश्व मानकों को पूरा कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, भारतीय पनीर अब देश की सीमाओं को पार कर वैश्विक बाजारों और रेस्तरां तक पहुंच रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत का स्वाद, परंपरा और गुणवत्ता दुनिया भर के लोगों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी।
देश 9 मई को 'पोचीशे बोइशाख' के अवसर पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाएगा। श्री मोदी ने गुरुदेव टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे एक बहुमुखी व्यक्तित्व थे जिन्होंने कई प्रतिष्ठित संस्थानों की नींव रखी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव टैगोर ने ऐसे उद्योगों का समर्थन किया जो स्थायी रोजगार प्रदान करते थे और गांवों को लाभ पहुंचाते थे। उन्होंने आगे कहा कि रवींद्र संगीत का प्रभाव आज भी विश्व स्तर पर कायम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि मई का महीना सभी को 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। उन्होंने उन सभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जिन्होंने जनता में देशभक्ति की भावना जगाई। अपने संबोधन के समापन में, श्री मोदी ने बच्चों से आग्रह किया कि वे अपनी ग्रीष्मकालीन छुट्टियों का भरपूर आनंद लें और कुछ नया सीखने का प्रयास करें। उन्होंने सभी से ग्रीष्म ऋतु के दौरान अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने का भी आग्रह किया।



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