भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष तथागत अवशेष लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की यात्रा पर ले जाए जा रहे हैं। यह पहली बार है जब ये पवित्र अवशेष देश के भीतर किसी प्रदर्शनी के लिए अपने स्थायी स्थान से बाहर जाएंगे। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई, जिसमें केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना उपस्थित थे।
यह प्रदर्शनी अगले महीने की पहली तारीख से शुरू होकर 15 दिनों तक चलेगी। अवशेषों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें जेड-श्रेणी की सुरक्षा वाले विशेष विमान से ले जाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल एक प्रदर्शन नहीं बल्कि देश की आत्मा और सभ्यता का उत्सव होगी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में राष्ट्राध्यक्षों, भिक्षुओं और विश्वभर के श्रद्धालुओं सहित भारी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है।
उन्होंने उल्लेख किया कि पवित्र अवशेषों की ऐसी ही अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में विभिन्न देशों की व्यापक भागीदारी रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत का सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव मजबूत हुआ है। श्री शेखावत ने इस बात पर जोर दिया कि भगवान बुद्ध की अहिंसा, करुणा और आंतरिक जागृति की शिक्षाएं आज के अनिश्चितता और संघर्ष से भरे वैश्विक परिवेश में अत्यंत प्रासंगिक हैं।
मंत्रालय ने जानकारी दी कि प्रदर्शनी के आयोजन स्थलों में महाबोधि अंतर्राष्ट्रीय ध्यान केंद्र, लेह पैलेस का धर्म केंद्र और सीआईबीएस शामिल हैं। मंत्रालय ने आगे बताया कि यह प्रदर्शनी अगले महीने की 11 से 12 तारीख तक ज़ांस्कर में भी चलेगी, जिसके बाद अगले महीने की 14 तारीख को लेह में समापन समारोह होगा और अगले महीने की 15 तारीख को पवित्र अवशेषों का प्रस्थान होगा।




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