. शिमला। हिमाचल
प्रदेश में बारिश के पानी के संरक्षण और मिट्टी कटाव रोकने के लिए अब एक समान नीति
बनाई जाएगी। प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने 14 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर
दिया है। पीसीसीएफ (प्रिंसीपल चीफ कंजरवेट ऑफ फॉरेस्ट्स) की अध्यक्षता में यह
कमेटी बनाई गई है।
यह कमेटी दो महीने के भीतर व्यापक ड्राफ्ट नीति
तैयार कर सरकार को सौंपेगी। इस संबंध में वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर
से अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के तहत हाईकोर्ट में चल रहे मामले कोर्ट ऑन इट्स
ओन मोशन बनाम राज्य सरकार के तहत यह नीति बनाना जरूरी किया गया है। इसके बाद सरकार
ने विभिन्न विभागों की एक संयुक्त कमेटी बनाई है। कमेटी की अध्यक्षता प्रधान मुख्य
अरण्यपाल (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स)
आपदा प्रबंधन, जनजातीय विकास, उद्योग, शहरी विकास, पर्यावरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, बागवानी, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, लोक निर्माण विभाग और जल शक्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सदस्य
बनाए गए हैं। बिलासपुर के वन संरक्षक (फायर प्रोटेक्शन एंड फायर कंट्रोल) को सदस्य
सचिव नियुक्त किया गया है। अधिसूचना के अनुसार कमेटी सबसे पहले पिछले दो वर्षों
में प्रदेश में वर्षा जल संरक्षण और मिट्टी संरक्षण से जुड़े कार्यों का पूरा डाटा
जुटाएगी।
किन योजनाओं पर कितना पैसा खर्च हुआ, कौन से कार्य सफल रहे और किन क्षेत्रों
में कमी रही, इसका भी
विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों, पहाड़ी ढांचे, जल स्रोतों, जैव विविधता, मौसमीय बदलाव और पर्यावरणीय चुनौतियों
को ध्यान में रखते हुए नई नीति तैयार की जाएगी। कमेटी जरूरत पडऩे पर विशेषज्ञ
संस्थानों और विषय विशेषज्ञों की मदद भी ले सकेगी। सरकार ने कमेटी को नियमित
बैठकें और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हर पंद्रह दिन में
सरकार को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।